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Sunday, 29 March 2026

मानो या ना मानो...

मानो या ना मानो...

 हर तरफ़ है ज़िक्र तुम्हारा तुम मानो या ना मानो
कहता है वो टूटता तारा तुम मानो या ना मानो

बचपन के दिन फिर से जीने की ख्वाहिश है लेकिन
ला-हासिल हैं पल दोबारा तुम मानो या ना मानो

मंज़िल की धुन में रह कर हम तो मंज़र देख न पाए,
खोया है हर एक नज़ारा तुम मानो या ना मानो

स्टेटस और स्टोरी में ही, अब तो सिमट गई है दुनिया
उसी में उलझा है जग सारा तुम मानो या ना मानो

वो जो इक नन्हा-सा परिंदा, रहता था उस डाली पर,
फिरता है बेघर-बेचारा, तुम मानो या ना मानो

बाहर से तो सारी बस्ती खुशहाली मे डूबी है
अंदर ग़म का है गलियारा, तुम मानो या ना मानो

चंदना सोमाणी ©®

Monday, 9 March 2026

तेरी आँखो मे...

        तेरी आँखो मे...      

उतर आई है यह कैसी शरारत तेरी आँखों में
मोहब्बत है या फिर कोई बग़ावत तेरी आँखों में

झुकी पलकें कि जैसे सजदा ठहरा हो दुआओं में
कि जैसे देखते हैं हम इबादत तेरी आँखों में

हमारी गुफ़्तगू को एक पल में रोक देती है
बड़ी संजीदा लगती है शराफ़त तेरी आँखों में

ज़माने की जफ़ाओं से मुझे अब ख़ौफ़ क्या होगा
वफ़ा के साथ घुलती है ये चाहत तेरी आँखों में

हज़ारों ख़्वाब बिखरे हैं सितारों की तरह लेकिन
कहाँ से ढूँढ लाएँ फिर से क़िस्मत तेरी आँखों में

नहीं अब और हसरत शायरी से अपनी दुनिया में
ग़ज़ल को मिल गई है अपनी राहत तेरी आँखों में

चंदना सोमाणी ©

कितनी बातें...

कितनी बातें...  हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...