तेरी आँखो मे...
उतर आई है यह कैसी शरारत तेरी आँखों में
मोहब्बत है या फिर कोई बग़ावत तेरी आँखों में
झुकी पलकें कि जैसे सजदा ठहरा हो दुआओं में
कि जैसे देखते हैं हम इबादत तेरी आँखों में
हमारी गुफ़्तगू को एक पल में रोक देती है
बड़ी संजीदा लगती है शराफ़त तेरी आँखों में
ज़माने की जफ़ाओं से मुझे अब ख़ौफ़ क्या होगा
वफ़ा के साथ घुलती है ये चाहत तेरी आँखों में
हज़ारों ख़्वाब बिखरे हैं सितारों की तरह लेकिन
कहाँ से ढूँढ लाएँ फिर से क़िस्मत तेरी आँखों में
नहीं अब और हसरत शायरी से अपनी दुनिया में
ग़ज़ल को मिल गई है अपनी राहत तेरी आँखों में
चंदना सोमाणी ©

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