Followers

Tuesday, 24 February 2026

मराठी गझल - होत गेला

गझल - होत गेला 


निष्पर्ण होत गेला 
तो कर्ण होत गेला 

सांडून रंग सारे 
निर्वर्ण होत गेला 

हा बाण वेदनांचा 
आकर्ण होत गेला 

प्रत्येक शब्द माझा 
संवर्ण होत गेला 

जाळून देह सारा
उत्पर्ण होत गेला 

चंदना सोमाणी ©®

No comments:

Post a Comment

कितनी बातें...

कितनी बातें...  हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...