Followers

Wednesday, 31 January 2024

राम धुन...



   
रामधुन...

ना मैं शबरी ना ही अहिल्या
पर दर्शन को मन ललचाये....

पल पल मैं राम धुन गाऊॅं 
राम राम जपती ही जाऊॅं

मीठे मीठे बेर खिलाऊॅं
या फिर मैं पत्थर बन जाऊॅं
ऐसा भाग कहा से लाऊॅं
जो दर्शन प्रभू के मैं पाऊॅं

तुम बिन सूना सूना आंगन
अब तो पधारो हे रघुनंदन
सफल कहानी हो जीवन की
और राम मय हो हर स्पंदन

ज्योत जलाऊॅं शीश नवाऊॅं
या बहता पानी बन जाऊॅं
इस जीवनकी आस एकही
तन मन धन से वारी जाऊॅं

चंदना सोमाणी ©

2 comments:

कितनी बातें...

कितनी बातें...  हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...