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Monday, 19 August 2024

चार ओळी - १५


 पानगळ ही निराशेची 
जी शिशिरात गेली होऊन 
आशा उद्याच्या बहरण्याची 
वसंत येईल फुलून 

चंदना सोमाणी ©®

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