Followers

Friday, 2 August 2024

चार ओळी - १३


 ओंजळ भरून घेतला तरी 
ओघळून जातोच हा पाऊस 
ओघळेल का कधी असाच 
मनातील किल्मिषांचा पाऊस 

चंदना सोमाणी ©®

No comments:

Post a Comment

कितनी बातें...

कितनी बातें...  हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...