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Monday, 16 September 2024

चार ओळी - २०


 घरंगळलेला पहिला अश्रू 
अन् रडू नकोस खूणावणारे बोट
कळले मला तेव्हाच
तुझ्या मिठीत नव्हती रे खोटं

चंदना सोमाणी ©®

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