Followers

Thursday, 4 April 2024

चार ओळी - 2


 बागेतल्या फुलांकडे पाहून
आज थोडं मन गलबललं
कोणाच्या दुःखाने पाकळीवर
हे दवबिंदू विसावलं

चंदना सोमाणी ©®


2 comments:

कितनी बातें...

कितनी बातें...  हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...