कोरड्या नदीच्या पात्रासारखी
कोरडी ती
ओलेत्या स्पर्शाने
आता दुधडी भरून वाहत आहे...
मृग नक्षत्रासारखा
बरसलाच ना
शेवटी
तू ...😊
चंदना सोमाणी ©®
कितनी बातें... हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...
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