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Saturday, 18 May 2024

और ये बारिश...

और ये बारिश...

हिज़्र का आलम और ये बारिश
फूल पे शबनम और ये बारिश 

सहरा में बरसे बूंदों के फूल
इत्र का मौसम और ये बारिश

यादों ने छेड़े फिर मद्धम सुर
महफ़िल और हम और ये बारिश

उम्मीदों से भरा है कितना
ख्वाबों का अल्बम और ये बारिश 

मन में कैसा कोहरा है ये
आंख भी है नम और ये बारिश

अपने आप में घुलता है ये
मेहंदी सा ग़म और ये बारिश

चंदना सोमाणी ©

2 comments:

  1. उफ्.. ये ग गर्मी और ये लफ्जों की बारिश...जब भी आपकी ग़ज़ल आती है हमारे लिये "इत्र का मौसम" लाती है. बारिश पे ग़ज़ल लिखना चाहे मराठी *पुन्हा पावसाळा* हो या हिंदी *और ये बारिश* आप बेमिसाल लिखते हो. 🫡🫡🫡 हमेशा की तरहा अनछुए खयाल.... आपके खयालों की उंचाई काबिल - ए - तारिफ. 👌👌👌
    उम्मीदों से भरा है कितना
    ख्वाबों का अल्बम और ये बारिश

    अपने आप मे घुलता है ये
    मेहंदी सा ग़म और ये बारिश 🌧️ 🌧️
    हासिल - ए - ग़ज़ल शेर
    गझल सम्राज्ञी....बस आप आप आप आप ही आप नुर - ए- ग़ज़ल हो. 🩷🩷😘😘

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    1. तहे दिल से शुक्रिया ‼️ इस बेहद खुबसूरत लफ्ज़ों के लिए...

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