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Thursday, 11 July 2024

चार ओळी - ७

 

कोरडी माती पाहूनही
पावसा का रे बरसत नाही 
का तुझे मन धरतीच्या 
मिलनासाठी तरसत नाही?

चंदना सोमाणी ©®

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