पाऊस सुरू झाला अन्
भावना उचंबळून येऊ लागल्या
कधी शब्द तर कधी चित्र बनून
कागदावर उतरू लागल्या
चंदना सोमाणी ©®
कितनी बातें... हममें तुममें रह जाती हैं कितनी बातें चश्म-ए-नम भी कह जाती हैं कितनी बातें सब्र की पाबंदी तो नाज़िल है जुबां पे, ख़ामोशी में ...
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