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Tuesday, 16 July 2024

चार ओळी - ९

 


किती अन् कसं ना
मनाला झुलवत ठेवायचं 
सारे क्षण ओळखीचे तरी 
अनोळखी असल्याचं भासवायचं

चंदना सोमाणी ©®

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