कुछ अनजानी सी...
कुछ अनजानी सी लगती है वो हमें
कि जिंदगानी सी लगती है वो हमें
क्या कहकर बरसती हैं फ़िर से बुंदे
एक कहानी सी लगती है वो हमें
ये यादें हैं या फ़िर हुजूमे मेहमान
आनी जानी सी लगती है वो हमें
ता उम्र जो बेगानी सी लग रहीं थीं
अब पहचानी सी लगती है वो हमें
जिंदगी गर धुआं नहीं है तो क्या है
फ़िर बेमानी सी लगती है वो हमें
चंदना सोमाणी ©®
कि जिंदगानी सी लगती है वो हमें
क्या कहकर बरसती हैं फ़िर से बुंदे
एक कहानी सी लगती है वो हमें
ये यादें हैं या फ़िर हुजूमे मेहमान
आनी जानी सी लगती है वो हमें
ता उम्र जो बेगानी सी लग रहीं थीं
अब पहचानी सी लगती है वो हमें
जिंदगी गर धुआं नहीं है तो क्या है
फ़िर बेमानी सी लगती है वो हमें
चंदना सोमाणी ©®

No comments:
Post a Comment