क्यो है...
हर जुबां पर एक कहानी क्यों है
जो बह ना जाए वहीं पानी क्यों है
जहां तुम्हारे कदम पीछे हट गए
उसी मोड़ पे आज रवानी क्यों है
कोई माहताब नहीं है शहर में
फिर भी रात इतनी सुहानी क्यों है
ये दिवानगी हमें रुला दे फिर से
ये कहानी इतनी रुहानी क्यों है
हमसे सिर्फ़ ज़ख़्म ही मिलें गर उन्हें
बेमतलब युहीं मेहरबानी क्यों है
चंदना सोमाणी ©®
जो बह ना जाए वहीं पानी क्यों है
जहां तुम्हारे कदम पीछे हट गए
उसी मोड़ पे आज रवानी क्यों है
कोई माहताब नहीं है शहर में
फिर भी रात इतनी सुहानी क्यों है
ये दिवानगी हमें रुला दे फिर से
ये कहानी इतनी रुहानी क्यों है
हमसे सिर्फ़ ज़ख़्म ही मिलें गर उन्हें
बेमतलब युहीं मेहरबानी क्यों है
चंदना सोमाणी ©®

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