रंग ग़ज़ल का निखरा है
ऊपर ऊपर बिखरा है
अंदर अंदर गहरा है
तुमसे बातें करने को
चांद जमीं पे उतरा है
मुझ तक उसको आना था
मुझ तक आकर ठहरा है
ढलती जाए साँझ वहां
वक़्त ने बांधा सेहरा है
हल्का हल्का धुॅंधला सा
आखोंमे क्यू बदरा है
हर धुन मेरी सजती है
रंग ग़ज़ल का निखरा है
चंदना सोमाणी ©®
अंदर अंदर गहरा है
तुमसे बातें करने को
चांद जमीं पे उतरा है
मुझ तक उसको आना था
मुझ तक आकर ठहरा है
ढलती जाए साँझ वहां
वक़्त ने बांधा सेहरा है
हल्का हल्का धुॅंधला सा
आखोंमे क्यू बदरा है
हर धुन मेरी सजती है
रंग ग़ज़ल का निखरा है
चंदना सोमाणी ©®

खयालों की मलिका...👑❤️
ReplyDeleteहिंदी मे भी अपना जादू चला रही हो...👍👍👏👏
तहेदिलसे शुक्रिया इतनी बेहतरीन शायरी हमे देने के लिये. आपकी प्रतिभा के लिये लाखो करोडो सलाम...🫡🫡🫡
तहे दिल से शुक्रिया ‼️
Deleteसही बात है किरण.. आज तक मराठी गझल पे राज करने वाली रानी अब हिंदी गझल पे राज खरेदी l
ReplyDeleteKeep it up dear ♥️
बहुत बहुत आभार आपका 💐
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