तन्हाईयाँ...
फिर याद दिलाती हैं तन्हाईयाँ
हर वक़्त सताती हैं तन्हाईयाँ
ये रातें, और महकती सी बातें
क्या ख़्वाब सजाती हैं तन्हाईयाँ
तब साथ निभाती थी आहट तेरी
अब साथ निभाती हैं तन्हाईयाँ
ना जाने किस हक़ से आ जाती हैं
शब भर तड़पाती हैं तन्हाईयाँ
यादों, लम्हों, अश्क़ों के ये मोती
क्या ख़ूब लुटाती हैं तन्हाईयाँ
चंदना सोमाणी ©®
हर वक़्त सताती हैं तन्हाईयाँ
ये रातें, और महकती सी बातें
क्या ख़्वाब सजाती हैं तन्हाईयाँ
तब साथ निभाती थी आहट तेरी
अब साथ निभाती हैं तन्हाईयाँ
ना जाने किस हक़ से आ जाती हैं
शब भर तड़पाती हैं तन्हाईयाँ
यादों, लम्हों, अश्क़ों के ये मोती
क्या ख़ूब लुटाती हैं तन्हाईयाँ
चंदना सोमाणी ©®

आपकी शायरी हमें तनहां रहनेही नही देती...हर वक्त साथ निभाती है...❤️...मोहतरमा
ReplyDeleteहर एक अल्फ़ाज़ एक नई कहानी बताता हैं...हर एक शेर का अंदाज कुछ अलग कुछ खास है...इस शायरी पे मैं जा निसार कर दू✍️👑❤️
बहुत-बहुत शुक्रिया ‼️
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